बैरी बदरवा

गोइंड़े ठाढ़े बदरऊ न बरसैं ।
हमरी अटरिया पे झाँकि दिखावें
हमहीं बुनियाँ को तरसें ॥
गोइंड़े ठाढ़े बदरऊ न बरसैं ॥

जाय के खेतवा से मटिया लै आई
बारे कुम्हरवा से घइला गढ़ाई
हमरी तलरिया से पनिया उड़ाय लिययँ
हमहीं पनियाँ का तरसैं ॥

भोर भए घनि-घनि खुब छावयँ
दुपहरिया म टपक दिखावयँ
साँझ परे अपने घर भागयँ
नान्ह चिरइयन जैसैं ॥

बैरी बदरवा का घर से भगाय दूँगी
अपनी अंटरिया से दूर उड़ाय दूँगी
जहाँ से आए हो वहीं लवट जावो
जौने रहिया डगर से ।
 गोइंड़े ठाढ़े बदरऊ न बरसैं ॥

गोइंड़े- नज़दीक ही
बुनियाँ- बूँदें

**जिज्ञासा सिंह**

मेरे नैनों में श्याम बस जाना 🌺

मेरे नैनों में श्याम बस जाना,
मैं दर्पण बहाने देखूँ ॥

कारी कारी अँखियों में प्रीति बसी है, 
अधरों पे मुस्कान ऐसी सजी है,
जैसे कोयल है गाए तराना,
मैं फूलन बहाने देखूँ ॥
 
मैं राधा रानी, बनूँ तेरी रानी,
जग में अमर होगी अपनी कहानी,
कान्हा मेरे हृदय बस जाना,
मैं धड़कन बहाने देखूँ ॥

बहियाँ पकड़ कान्हा साथ चलूँगी,
बनके बसुरिया मैं रोज बजूँगी,
तुम जमुना किनारे आना,
मैं गउअन बहाने देखूँ ॥

कुंज गलिन में, सखियाँ बुलाऊँगी, 
रास रचाऊँगी, तुमको रिझाऊँगी,
तुम माखन चुराने आना
मैं ग्वालन बहाने देखूँ ॥

**जिज्ञासा सिंह**

शिव जी का भजन🌺


शिव आए मेरे द्वारे मस्तक पर गंगा धारें ।               

मैं मृग छाला ले आई 

और प्रभु का आसन बिछाई       

चरण गंगा के जल से पखारे,

मस्तक पर गंगा धारे ॥


शीश चंदा बड़ा है निराला,

गले सोहे है सर्पन की माला ।

हाथों से डमरू बजा रे, 

मस्तक पर गंगा धारे ॥  


लगा धरती पे अद्भुत मेला, 

प्रभु वंदन की सुंदर बेला  

माह सावन का धूम मचा रे, 

मस्तक पर गंगा धारे ॥ 

           

ठाढे हैं सकल नर नारी, 

त्रिपुरारी रहे निहारी ।                 

बर माँगे है सीस नवा रे, 

मस्तक पर गंगा धारे ॥

**जिज्ञासा सिंह**       

चूड़ी है रंगबिरंगी

 

अरे रामा चूड़ी है रंगबिरंगी 

चुनरिया धानी रे हारी ।

मेरे माथे सजी है बिंदिया,

नथनिया न्यारी रे हारी ॥


मैं पहन के निकली अँगनवाँ

हैं द्वारे से आए सजनवाँ

मैं देख उन्हें शरमाई रामा

अरे रामा पुरवा चले बयार

पिया पे जाऊँ वारी रे हारी ॥


अरे रामा चूड़ी है रंगबिरंगी 

चुनरिया धानी रे हारी ॥


मोरी चूड़ी खनखन बोले

मोरा जियरा रहि रहि डोले

मोरी निमियाँ पे बोले कोयलिया रामा

अरे रामा पपिहा गावे मल्हार

बिहंसें सखि प्यारी रे हारी ॥


अरे रामा चूड़ी है रंगबिरंगी 

चुनरिया धानी रे हारी ॥


अब सावन झूले पड़ेंगे

हम सखियन के संग झूलेंगे

हम मारेंगे पेंग अकासी रामा

अरे रामा जाएँगे नभ के पार

लचक जाए डारी रे हारी ॥


अरे रामा चूड़ी है रंगबिरंगी 

चुनरिया धानी रे हारी ॥


**जिज्ञासा सिंह**

फौज नौकरिया रे हारी..कजरी

 


अरे रामा पियवा चले लद्दाख़,

फौज नौकरिया रे हारी ।

मैंने भेजा है अरती उतार,

फौज नौकरिया रे हारी ॥


मैं रचि रचि भोजना बनाई

और अपने पिया का खिलाई

मैं लौंगा इलायची मँगाई रामा

अरे रामा खाते पिया मोरे पान

कि होंठवा ललारी रे हारी ॥


अरे रामा पियवा चले लद्दाख़,

फौज नौकरिया रे हारी ॥


पिया वार मेमोरियल जैहैं

और फ़ोटू मोहे पठैहैं

हम फ़ोटू का सबरी मढ़ैहैं रामा

अरे रामा घर मा दैहौं टाँग

रोज रोज देखिहौं रे हारी ॥


अरे रामा पियवा चले लद्दाख़,

फौज नौकरिया रे हारी ॥


पिया धरती का बहुत मोहावें

उसै अपनी अम्मा बतावें

मैं बलि बलि जाऊँ सुन सुन रामा 

अरे रामा देसवा से बहुत पियार

करेजवा वारी रे हारी ॥


अरे रामा पियवा चले लद्दाख़,

फौज नौकरिया रे हारी ॥


मैं लड़िकन का अपने बताऊँ

यहि देसवा से प्रेम सिखाऊँ

मैं सरहद की फोटु दिखाऊँ रामा

अरे रामा उन्हऊँ का भेजौं लद्धाख

देस रखवारी रे हारी ॥


अरे रामा पियवा चले लद्दाख़,

फ़ौज नौकरिया रे हारी ॥


**जिज्ञासा सिंह**

एक पाती लिखूँगी मैं आज..सावन गीत

   

एक पाती लिखूँगी मैं आज 

हरे हरे सावना ।

मोरी अम्मा में जिया मोरा लाग 

हरे हरे सावना ॥


आजु सपन मैं देखी बबुल जी का घर

सब अँगन में बैठे हैं साँझ पहर

बाबा दादी बुलायें हम दौड़ी हैं आएँ

मन खोल लिखूँ हिय बात

हरे हरे सावना ॥


मेरे सपन में बचपन की सखियाँ दिखैं

मेरे गोद में गुड्डा औ गुड़िया दिखैं

मोरे गुड्डा औ गुड़िया का ब्याह रचा

मोरे द्वारे पे आई बरात 

हरे हरे सावना ॥


अब काव लिखूँ यहि पाती सखी

मन हर्षित है मन होत दुखी

मोरे ससुरे म नैहर की कौन सुने

आजु जियरा है मोरा उदास

हरे हरे सावना ॥


मैं बाबुल लिखूँ या बिरन लिखूँ

यहि सवन न आए अब चैन लिखूँ

कोई मोहे बताए काव काव लिखूँ

मोरे जियरा में सौ सौ बात 

हरे हरे सावना ॥


एक पाती लिखूँगी मैं आज 

हरे हरे सावना ।

मोरी अम्मा में जिया मोरा लाग 

हरे हरे सावना ॥


**जिज्ञासा सिंह**