गौरैया ( गौरैया दिवस-लोकगीत )


मेरे घर आना, तू प्यारी गौरैया ।

शोर मचाना, तू प्यारी गौरैया ।।


तोता को लाना, मैना को लाना 

बुलबुल को लाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

पेड़ लगाऊँगी, पकड़िया लगाऊँगी 

घोसला बनाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

दाना भी दूँगी, तुम्हें पानी भी दूँगी 

ख़ूब नहाना, तू प्यारी गौरैया  ।।

मेरे घर...

ख़ूब बड़ा सा है, मोरा अँगनवाँ 

फुदक फुदक जाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

मोरे अंगनवाँ में झूला पड़ा है 

झूलझूल जाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

शाम सवेरे मैं, तुमको निहारूँगी 

हँस बतियाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

रोज़ सुबह तुम, मुझको जगाना  

गाके मधुर गाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

पर्यावरण की तुम हो सहेली

रूठ नहीं जाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...


**जिज्ञासा सिंह**

31 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 19 मार्च 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आदरणीय यशोदा दीदी,मेरे इस ब्लॉग का गीत "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" साझा होगी,ये मेरे लिए बहुत ही सुखद अनुभूति का क्षण है,सादर नमन एवम सादर शुभकामनाएं ।

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  2. सादर नमस्कार।

    कृपया १९ को २० पढ़े।

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  3. अनीता जी, मेरे इस ब्लॉग की रचना को चर्चा अंक में शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार, आपको मेरा सादर नमन एवम वंदन ।

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  4. बहुत बहुत आभार विश्वमोहन जी,आपको मेरा सादर नमन ।

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  5. आहा..बहुत सुंदर सरल,सहज और मधुर लोकगीत,
    प्रिय जिज्ञासा जी गौरेया की इतनी मनोहारी किलकारी सुनकर मन प्रसन्न हुआ।
    आपकी रचनात्मक प्रशंसनीय है।
    शुभकामनाएं
    सादर।

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    1. प्रिय श्वेता जी,ढोलक पर जब गया जाएगा तो बड़ा मधुर लगेगा, गौरैया रानी तर जाएंगी सुनकर, है न । आपकी प्यारी प्रशंसा को नमन है ।

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  6. बहुत सुंदर लोकगीत,जिज्ञासा दी।

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  7. बहुत बहुत आभार प्रिय ज्योति जी,आपको सादर नमन ।

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  8. बहुत ही सुंदर, मधुर गीत लाजवाब

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    1. बहुत बहुत आभार आपका ज्योति दीदी, आपको मेरा अभिवादन ।

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  9. आपका बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हूं, ब्लॉग पर आपकी टिप्पणी देखकर मन खुश हो गया,आपको नमन एवम वंदन ।

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  10. प्यारा लोकगीत । सुंदर भावों का संयोजन ।

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    1. बहुत बहुत आभार आदरणीया दीदी, आपको सादर नमन एवम ।

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  11. उत्तर
    1. आपका मेरे ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है एवम आपकी प्रशंसा को हृदय से नमन करती हूं,स्नेह बनाए रखें,इसी आशा में जिज्ञासा सिंह ।

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  12. वाह!कितना प्यारा लोकगीत।
    सौंधी सी महक और दिल में अह्लाद जगाती मनभावन अभिव्यक्ति।
    चिरैया दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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    1. आपका बहुत बहुत आभार आदरणीया कुसुम जी, आपकी प्रशंसनीय प्रतिक्रिया को हार्दिक नमन एवम वंदन है ।

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  13. अति सुंदर आदरणीय जिज्ञासा जी

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    1. बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय, आपकी प्रशंसा को हृदय से नमन करती हूं ।

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  14. संवेदना से भरपूर कविता |हार्दिक बधाई और शुभकामनायें

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    1. बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय, आपकी प्रशंसनीय प्रतिक्रिया को हार्दिक नमन एवम वंदन ।

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  15. बेहद प्यारा गीत, आनन्द आ गया जिज्ञासा जी

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  16. आपका बहुत बहुत आभार प्रिय कामिनी जी, आपकी प्रशंसा को हृदय से नमन करती हूं ।

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  17. निश्चय ही बहुत प्यारा गीत है यह । बालगोपालों को सिखाने चाहिए हमें ऐसे गीत ताकि वे पशुपक्षियों से प्रेम करना सीखें ।

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  18. जी,सही कहा आपने,आपकी विशेष प्रतिक्रिया मन को छू गई । ब्लॉग पर सदैव स्नेह की अभिलाषा में जिज्ञासा सिंह ।

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  19. खूबसूरत रचना...। इसे मैं अपनी मासिक पत्रिका 'प्रकृति दर्शन' में प्रकाशित करना चाहता हूं...। आप चाहें तो ईमेल editorpd17@gmail.com पर प्रेषित कर सकते हैं...। आप पत्रिका देखना चाहें तो आपको व्हाट्सएप पर कुछ अंक भेजे जि सकते हैं...।

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  20. बहुत बहुत आभार संदीप जी, मैंने अपनी कविता प्रेषित कर दी थी, मैंने पत्रिका के अंश देखे हैं,थोड़ी व्यस्तता होने के कारण अभी सही से नहीं देख पायी हूँ, बाद में ज़रूर पढ़ूँगी।सादर शुभकामनाएँ ।

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