मैं दर्पण बहाने देखूँ ॥
कारी कारी अँखियों में प्रीति बसी है,
अधरों पे मुस्कान ऐसी सजी है,
जैसे कोयल है गाए तराना,
मैं फूलन बहाने देखूँ ॥
मैं राधा रानी, बनूँ तेरी रानी,
जग में अमर होगी अपनी कहानी,
कान्हा मेरे हृदय बस जाना,
मैं धड़कन बहाने देखूँ ॥
बहियाँ पकड़ कान्हा साथ चलूँगी,
बनके बसुरिया मैं रोज बजूँगी,
तुम जमुना किनारे आना,
मैं गउअन बहाने देखूँ ॥
कुंज गलिन में, सखियाँ बुलाऊँगी,
रास रचाऊँगी, तुमको रिझाऊँगी,
तुम माखन चुराने आना
मैं ग्वालन बहाने देखूँ ॥
**जिज्ञासा सिंह**
