मेरे मैया की ऊँची अंटारी,मैं तो धीरे धीरे चढ़कर आई
सास ससुर को साथ में लाई,अपने माता पिता भी लाई
मैं तो....
अपनी मैया के लिए चुनरी भी लाई,चुनरी मैं लाई
मैं तो भोजन भी लाई,मैं तो दीप जलाने आई,
मैं तो धीरे धीरे....
भरी रहें मेरे देश की नदियाँ, देश की नदियाँ,
औ ताल तलरियाँ
मैं तो बरसात मांगन आई, मैं तो धीरे धीरे ....
फूलों फलों से लदीं हों बगियाँ,
बागों में उड़ती हों, तितली औ चिड़ियाँ
मैं तो हरियाली मांगन आई,मैं तो धीरे धीरे ....
देश की मेरे भरी हों भंडारे, चलते हो लंगर
और खाएं कतारें,
मैं तो अन धन मांगन आई मैं तो धीरे धोरे.......
मेरे देश का आँगन भरा हो, सद्भाव शिक्षा का दीप जला हो
मैं तो घर बार मांगन आई, मैं तो धीरे धीरे...
मेरे मैया की ऊँची अटारी, मैं तो धीरे धीरे चढ़ कर आई ।।
**जिज्ञासा सिंह**