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देवी गीत..

 

(चुपके चुपके आईं, भवानी मोरे अँगनवाँ


भोर भये रवि आने से पहले

देख नहीं मैं पाईभवानी मोरे अँगनवाँ


बाग हँसन लगेकमल खिलन लगे

कलियाँ हैं लहराईंभवानी मोरे अँगनवाँ


गोदिया बालक हँसि मुस्काने

मोहें नज़र नहीं आईं,भवानी मोरे अँगनवाँ


व्याकुल मन मोरा माँ को ढूँढ़े

दिख जाए परछाईंभवानी मोरे अँगनवाँ


मन देखाअंतर्मन देखा

हृदय बीच मुस्काईं, भवानी मोरे अँगनवाँ


नेह  श्रद्धा की छवि सुंदर

नैनन बीच समाईं, भवानी मोरे अँगनवाँ


चुपके-चुपके आईं, भवानी मोरे अँगनवाँ


(सारे नगर मची धूम जगदंबे आइँ

गाँव-शहर मची धूम माँ दुर्गे आइँ


पेड़ पकड़िया सब हर्षाने

चलीं हवाएँ झूम-झूम जगदंबे आइँ


नदियाँ बहन लगीं कुआँ भरन लगे

बादल बरसा घूम-घूम जगदंबे आइँ


अपनी अँटरिया पे चढ़ि-चढ़ि देखूँ

जयकारे नभ रहे चूम जगदंबे आइँ


आगे-आगे मैया पीछे संसार चले

अगल-बगल चले झुंड जगदंबे आइँ


जनगण मैया की अरती उतारें

बाजन बाजे बूम-बूमजगदंबे आइँ 


सारे नगर मची धूम जगदंबे आइँ 


**जिज्ञासा सिंह**

देवी गीत

मेरे मैया की ऊँची अंटारी,मैं तो धीरे धीरे चढ़कर आई
सास ससुर को साथ में लाई,अपने माता पिता भी लाई
मैं तो....

अपनी मैया के लिए चुनरी भी लाई,चुनरी मैं लाई
 मैं तो भोजन भी लाई,मैं तो दीप जलाने आई, 
मैं तो धीरे धीरे....

भरी रहें मेरे देश की नदियाँ, देश की नदियाँ,
औ ताल तलरियाँ  
मैं तो बरसात मांगन आई, मैं तो धीरे धीरे ....

फूलों फलों से लदीं हों बगियाँ,
 बागों में उड़ती हों, तितली औ चिड़ियाँ  
मैं तो हरियाली मांगन आई,मैं तो धीरे धीरे ....

देश की मेरे भरी हों भंडारे, चलते हो लंगर 
और खाएं कतारें,
 मैं तो अन धन मांगन आई मैं तो धीरे धोरे.......

मेरे देश का आँगन भरा हो, सद्भाव शिक्षा का दीप जला हो
मैं तो घर बार मांगन आई, मैं तो धीरे धीरे...

मेरे मैया की ऊँची अटारी, मैं तो धीरे धीरे चढ़ कर आई ।।

**जिज्ञासा सिंह**