इस ब्लॉग में मैंने स्वरचित लोकगीतों को उद्घृत किया है ,जो उत्तर भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं -
फगुनिया ओढ़नी
गौरैया ( गौरैया दिवस-लोकगीत )
मेरे घर आना, तू प्यारी गौरैया ।
शोर मचाना, तू प्यारी गौरैया ।।
तोता को लाना, मैना को लाना
बुलबुल को लाना, तू प्यारी गौरैया ।।
मेरे घर...
पेड़ लगाऊँगी, पकड़िया लगाऊँगी
घोसला बनाना, तू प्यारी गौरैया ।।
मेरे घर...
दाना भी दूँगी, तुम्हें पानी भी दूँगी
ख़ूब नहाना, तू प्यारी गौरैया ।।
मेरे घर...
ख़ूब बड़ा सा है, मोरा अँगनवाँ
फुदक फुदक जाना, तू प्यारी गौरैया ।।
मेरे घर...
मोरे अंगनवाँ में झूला पड़ा है
झूलझूल जाना, तू प्यारी गौरैया ।।
मेरे घर...
शाम सवेरे मैं, तुमको निहारूँगी
हँस बतियाना, तू प्यारी गौरैया ।।
मेरे घर...
रोज़ सुबह तुम, मुझको जगाना
गाके मधुर गाना, तू प्यारी गौरैया ।।
मेरे घर...
पर्यावरण की तुम हो सहेली
रूठ नहीं जाना, तू प्यारी गौरैया ।।
मेरे घर...
**जिज्ञासा सिंह**
