फगुनिया ओढ़नी




देखो सखी ओढ़नी मंगाई फागुन में

धानी रंग ओढ़नी बसंती रंग ओढ़नी
 लाल रंग ओढ़नी मंगाई फागुन में 

फूल छाप ओढ़नी चिरैया छाप ओढ़नी
हिरनी छाप ओढ़नी मंगाई फागुन में

ओढ़नी ओढ़ मैं बैठी झरोखे
आए गए बालम निहारें फागुन में

लाल रंग देखें चिरैया छाप देखें
देख देख हमका सतावें फागुन में

बार बार हमसे सजन यही पूछें
लाया कौन ओढ़नी बताओ फागुन में

संखियां सहेली संग गई मैं बजरिया
मिल गए यार पुराने फागुन में

हँस बतियाए, मिठैया खिलाए
ओढ़नी दिलाए गुलाबी फागुन में

इतनी बचन सुन बलमा जी रूठे 
बैठ गए हमसे रिसाय फागुन में 

ओढ़ के ओढ़नी मैं बैठी सेजरिया 
दीना बलम को चिढ़ाय फागुन में 

बड़ी रे जतन से सजन को मनाया 
लीना हिया से लगाय फागुन में 

देखो सखी ओढ़नी मंगाई फागुन में 

**जिज्ञासा सिंह**

होली की हार्दिक शुभकामनाएं
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गौरैया ( गौरैया दिवस-लोकगीत )


मेरे घर आना, तू प्यारी गौरैया ।

शोर मचाना, तू प्यारी गौरैया ।।


तोता को लाना, मैना को लाना 

बुलबुल को लाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

पेड़ लगाऊँगी, पकड़िया लगाऊँगी 

घोसला बनाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

दाना भी दूँगी, तुम्हें पानी भी दूँगी 

ख़ूब नहाना, तू प्यारी गौरैया  ।।

मेरे घर...

ख़ूब बड़ा सा है, मोरा अँगनवाँ 

फुदक फुदक जाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

मोरे अंगनवाँ में झूला पड़ा है 

झूलझूल जाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

शाम सवेरे मैं, तुमको निहारूँगी 

हँस बतियाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

रोज़ सुबह तुम, मुझको जगाना  

गाके मधुर गाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...

पर्यावरण की तुम हो सहेली

रूठ नहीं जाना, तू प्यारी गौरैया ।।

मेरे घर...


**जिज्ञासा सिंह**

भजन (शिवरात्रि)

मोहे भोले की चढ़ गई भाँग, गौरा पूजन गई

आँखों में चढ़ गई, माथे पे चढ़ गई
वो तो चढ़ गई मोरे कपाल, गौरा पूजन गई ।

अंदर से झूमीं, मैं बाहर से झूमीं 
मोहे झूमन लगा ब्रम्हांड, गौरा पूजन गई ।

झूम, झूम, गिर, गिर हिमालय को पहुँची
मैं तो पहुंच गई कैलाश, गौरा पूजन गई ।

ब्रम्हा जी ठाढ़े, वहाँ विष्णु जी ठाढे,
मेरे सम्मुख खड़े भोलेनाथ, गौरा पूजन गई ।।

उनको निहारूं, मैं खुद को निहारूं
मेरे नैना खुले अविराम, गौरा पूजन गई ।।

क्या मैं चढ़ाऊं, क्या माँगन मैं मांगू
मैं तो चरणों में गिर गई जाय, गौरा पूजन गई ।।

मन मेरा पुलकित है, तन मेरा हर्षित 
मेरे हिरदय में बसे महाकाल, गौरा पूजन गई ।।

मोहे भोले की चढ़ गई भाँग, गौरा पूजन गई ।।
      
  **जिज्ञासा सिंह**

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
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एक गृहणी की प्रतिज्ञा (महिला दिवस )

घर की मैं महारानी सुनो री सखी
अपने मन की रानी सुनो री सखी

पौधे लगाऊंगी फूल खिलाऊँगी
सब्जी उगाऊँगी फल भी उगाऊँगी
गमले में करूं बागबानी सुनो री सखी

आस पड़ोस को साफ कराऊंगी
सड़क किनारे मैं पेड़ लगवाऊंगी
करूंगी खुद निगरानी सुनो री सखी

योग करूंगी व्यायाम करूंगी
सेहत का सबके ध्यान रखूंगी
बीमारी घर से भगानी सुनो री सखी

कामवाली का अपने ध्यान रखूंगी
उसकी जरूरत पूरी करूंगी
काम हमारे वही आनी सुनो री सखी

बच्चों को अपना गौरव बनाऊंगी
शिक्षा दिलाऊँ, संस्कार सिखाऊँगी
अच्छी माँ जाऊं पहचानी सुनो री सखी

अपने लिए मैं वक्त निकालूंगी
मन के अधूरे सारे काम करूंगी
खुद को न अब तक जानी सुनो री सखी

घर को अपने व्यवस्थित रखूंगी
फिजूलखर्ची न बिल्कुल करूंगी
अपने ही मन में ठानी सुनो री सखी

सारी प्रतिज्ञा मैं पूरी करूंगी
शौक श्रृंगार बन ठन के रहूंगी
अब न करूंगी आनाकानी सुनो री सखी

अपने मन की रानी सुनो री सखी
घर की हूं महारानी सुनो री सखी....

        **जिज्ञासा सिंह**

माँ सरस्वती की अराधना


सरस्वती ! तुम बुद्धि की रानी 

मेरी शक्ति मेरी भक्ति 
तुम ही मेरी कहानी 
सरस्वती तुम.......

तुम को जब से है अपनाया 
जग की जानी कहानी 
सरस्वती तुम.......

जब तुमसे परिचय हो जाए 
सब कुछ लगे बेमानी 
सरस्वती तुम......

सब देवों को देव सा जानूँ
तुम जानी पहचानी 
सरस्वती तुम.......

द्वार तुम्हारे शीश झुकावें 
ज्ञानी और विज्ञानी 
सरस्वती तुम........

तन मन धन से द्वार तुम्हारे 
ठाढ़े हम अज्ञानी 
सरस्वती तुम........

दे दो जग को विद्या बुद्धि 
तुम हो बड़ी वरदानी
सरस्वती तुम.......

**जिज्ञासा सिंह**

तिरंगा चुनरी (गणतंत्र दिवस पर विशेष )

पहनी तिरंगा चुनरिया 
सजन मोहे लागी नजरिया 

चुनरी मोरी बंगाल से आई 
बाबू सुभाष नगरिया 
सजन मोहे लागी नजरिया 

लहंगा मोरा गुजरात से आया 
गाँधी पटेल नगरिया 
सजन मोहे लागी नजरिया 

चुनरी पहन मैं जिधर को जाऊँ 
घूम घूम देखे सजनिया
सजन मोहे लागी नजरिया 

हर सजनी सजना से माँगे 
मोरी तिरंगा चुनरिया 
सजन मोहे लागी नजरिया 

चाहे पिया छोड़ो चाहे मोहे राखो 
हम नाहीं देहैं जे चुनरिया 
सजन मोहे लागी नजरिया 

ई चुनरी मोहे जान से प्यारी 
भारत देश निशनियाँ 
सजन मोहे लागी नजरिया 

दूर देस जइहैं गोरी पैसा कमइहैं 
लै अइहैं लाख चुनरिया 
सजन मोहे लागी नजरिया 

अपनी सखिन का तुम बाँट दीजो 
लाख तिरंगा चुनरिया 
सजन मोहे लागी नजरिया 

पहन ओढ़ के निकली हैं गोरिया 
देशप्रेम की डगरिया
सजन मोहे लागी नजरिया 

पहनी तिरंगा चुनरिया 
सजन मोहे लागी नजरिया 

**जिज्ञासा सिंह** 


अवधी लोकगीतों में सुभाष बाबू

मेरी चाचीदादी द्वारा रचित लोकगीत, महान देशभक्त आदरणीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन पर पेश कर रही हूँ..एक गाँव की भोली भाली महिला की सच्ची श्रद्धांजलि..

बाबू सुभाषचंद्र बोस हमारी गलियों से निकल गए 

बागों में आए बगीचों में आए 
कर के वो मलिया से बात 
मलिनिया से छुप के निकल गए 
बाबू...

कुअना पे आए जगतिया पे आए 
कर के वो महरा से बात 
महरिनिया से बच के निकल गए 
बाबू...

तालों पे आए नहरिया पे आए 
करके वो धोबी से बात 
धोबिनिया से छुप के निकल गए 
बाबू...

महलों में आए दुमहलों में आए 
कर के वो राजा से बात 
औ रानी से बच के निकल गए 
बाबू...

**जिज्ञासा सिंह**