हिंदी पढ़ाओ ( ग्रामीण महिलाओं को समर्पित)


बच्चों को हिन्दी पढ़ाना प्यारी सखियों
भाषा का ज्ञान कराना प्यारी सखियों 

हिंदी के अक्षर समझ नहीं आए 
तो रेखा बना के सिखाना प्यारी सखियों

हिन्दी की मात्रा समझ नहीं आए 
तो शब्दों को बोल सुनाना प्यारी सखियों

हिंदी का व्याकरण समझ नहीं आए
तो चित्र बनाके दिखाना प्यारी सखियों

हिंदी के वाक्य समझ नहीं आए
तो कविता, कहानी सुनाना प्यारी सखियों

हिंदी की गिनती समझ नहीं आए
तो रोज दिनाँक लिखाना प्यारी सखियों

बातचीत करना उन्हें नहीं भाए
तो ये है, अपनी भाषा बताना प्यारी सखियों

बच्चों को हिन्दी पढ़ाना प्यारी सखियों
  
    **जिज्ञासा सिंह**

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर प्रेरक रचना।
    शुरुआत यहाँ से हो परिणाम बेहतर होंगे।

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  2. जी,कुसुम जी चाहत तो यही है । परंतु गांवों में भी हिंदी को घालमेल तरीके से पढ़ा रहे हैं । अंक तो लगभग किसी बच्चे को समझ ही नहीं आते । आपका बहुत आभार। हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवम बधाई 💐💐🙏🙏

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  3. बढ़िया जिज्ञासा जी । बस एक छोटा सुधार कीजियेगा । हिंदी राष्ट्र भाषा नहीं बन पाई । राज भाषा बनाया गया । अब भी है ।

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  4. आपकी सलाह पर अमल कर लिया है,नूपुर जी,बहुत आभार और हिन्दी दिवस पर आपको मेरी हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐

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  5. आपने सखियों को संदेश दिया है जिज्ञासा जी। वैसे मैंने भी सदा यही किया है एवं अब तक करता हूँ यद्यपि मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं।

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  6. आदरणीय जितेन्द्र जी,ये रचना मैंने ग्रामीण महिलाओं को केंद्र में रखकर लिखी,मेरी ग्रामीण महिलाओं से बातचीत में शिक्षा को लेकर बहुत ही दुखद अनुभव है,फिर हिंदी के लिए क्या कहें,कुछ नहीं जानतीं,मुश्किल से २ प्रतिशत महिलाएं सही मायने में साक्षर हैं,सही शिक्षा का बहुत अभाव है । आप की विशेष टिप्पणी की आभारी हूं,सादर नमन ।

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