आजु प्रणय की रात


आजु प्रणय की रात पिया तुम आ जाना

रंगमहल बीच झलर लगाऊँगी
झिलमिल तकिया मैं सेज सजाऊँगी
फूलन की बरसात, पिया तुम आ जाना

माँग मा मोरे सजी मोतियन लड़ियाँ 
छम छम बाजे पिया पैर पैजनियाँ 
मेहंदी रची मोरे हाथ, पिया तुम आ जाना

होठ सजे हैं जैसे खिल रहीं कलियाँ 
नैनों में छाई पिया, तोरी सुरतिया
बाट जोहे रनिवास, पिया तुम आ जाना

चाँद सितारे सब अँगना उतर आए
दीपक बाती पिया संग हिलमिल आए
जैसे हमारी मुलाकात, पिया तुम आ जाना

सात सुरों से सजा गीत सुनाऊँगी
पिया तेरी बाहों में झूल झूल जाऊँगी
साँसों में घुल जाए साँस, पिया तुम आ जाना

**जिज्ञासा सिंह**
चित्र:साभार गूगल 

20 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार(२२-१०-२०२१) को
    'शून्य का अर्थ'(चर्चा अंक-४२२५)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    1. अनीता जी,मेरे इस ब्लॉग पर आपके स्नेह की हृदयतल से आभारी हूं,चर्चा मंच में रचना को स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया । शुभकामनाओं सहित जिज्ञासा सिंह ।

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  2. बहुत मधुर, मनोरम रचना प्रिय जिज्ञासा जी। प्रेम पर्व की आहट के उपलक्ष्य में, अपने प्रणयी-पुरुष के प्रति प्रेमोन्मत ह्रदय का ये अनूठा प्रीतराग बहुत मनमोहक बन पड़ा है। लौकिक और आलौकिक भावों से सजी रचना के लिए ढ़ेरों शुभकामनाएं और बधाई।

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  3. बहुत बहुत आभार आपका प्रिय रेणु जी, आपकी इस सुंदर अभिव्यक्ति ने गीत को सार्थक बना दिया । आपको मेरा सादर नमन ।

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  4. आँचलिक पुट लिए प्रणय निवेदन करता सुंदर श्रृंगार गीत,
    क्या नायिका करवा चौथ पर पी को आने की मनुहार कर रही है?!
    बहुत सुंदर सृजन।

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार आपका कुसुम जी, आपकी इस सुंदर अभिव्यक्ति ने गीत को सार्थक बना दिया । आपको मेरा सादर नमन ।

      हटाएं
  5. वाह!जिज्ञासा जी ,बेहतरीन सृजन ।

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  6. आपका बहुत बहुत आभार शुभा जी ।

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