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जोति जले तुलसी छैयाँ

जोति जले तुलसी छैयाँ 
ओ रामा जोत जले है।
जगमग करे है डगरिया
हो रामा गाँव जगे है ।।

पपिहा गावे दादुर गावे,
गीत सुनावे कोयलिया 
ओ रामा मोर नचे है ।।

एकादशी की छाई है तरई,
दूर दिखे है उँजेरिया 
हो रामा चाँद छुपे हैं ।।
 
आओ सखी आओ दियना जराओ,
कटि जाय रैन अँधेरिया
सुरज कहीं दूर बसे हैं ।।

एकहि जोति तिमिर घन काटे,
जैसे अंबर म चँदनिया
हो रामा छाई दिखे है ।।

जोति जले पीपल छैयाँ,
हो रामा जोति जले है ।।

**जिज्ञासा सिंह**