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फेरे का गीत ( बन्ना ,बन्नी, )

भाँवरी हो रही रघुवर की ।

भाँवरी हो रही सिया वर की ।।

पहली भाँवरी देवों को अर्पित, कृपा सदा रहे गौरीशंकर की ।

भाँवरी हो रही.....।।

दूजी भाँवरी प्रकृति को अर्पित, छाँव रहे जीवन में तरूवर की ।

भाँवरी हो रही.....।।

तीजी भाँवरी पृथ्वी को अर्पित, बखारें भरी रहें इस घर की । 

भाँवरी हो रही......।।

चौथी भाँवरी मेघों को अर्पित, फुहारें पड़ती रहें पुष्कर की ।

भाँवरी होर रही......।।

पांचवीं भाँवरी अग्नि को अर्पित,ज्योति सदा जगमग हो इस घर की ।

भाँवरी हो रही......।।

छठी भाँवरी परिजन को अर्पित, दुआयें मिलती रहे प्रियवर की । 

भाँवरी हो रही.....।।

सातवीं भाँवरी बन्ना बन्नी की,बनी रहे जोड़ी कन्या वर की ।

भाँवरी हो रही......।।

भाँवरी हो रही सिया वर की......।

**जिज्ञासा सिंह**