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जयमाल गीत

करि सोलह सिंगार, पिया जी की राह निहारूँ ।

दर्पण देखूँ, देखि लजाऊँ ।
अपने पिया की छवी सजाऊँ ।
जैसे राजकुमार, पिया जी की राह निहारूँ ।।

सिर पे पगड़ी, बाँधी होगी ।
टीका चंदन रोली होगी ।।
अँखियाँ करेंगे कजरारि, पिया जी की राह निहारूँ ।।

हाथी घोड़ा साज पिया जी ।
सोलह कहारों वाली पलकी ।।
बैठ के आएँगे द्वार, पिया जी की राह निहारूँ ।।

मुझको निहारेंगे साजन जी ।
दिल में बसाएँगे साजन जी ।।
डालेंगे जयमाल, पिया जी की राह निहारूँ ।।

हमरी बिंदिया, हमरा कजरा ।
हमरी नथिया, हमरा गजरा ।।
उनसे सब सिंगार, पिया जी की राह निहारूँ ।।

करि सोलह सिंगार, पिया जी की राह निहारूँ ।।

**जिज्ञासा सिंह**