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ग्राम पंचायत चुनाव (स्त्री विमर्श -लोकगीत)


तुमको वोट न देबै, चाहे हम नोटा पे डाल आई रे,


पिछली बार हम तुमको जितायों 

कालोनी, कैट्टेल कुछू नाहीं पायों 

गलियन में भरा मोरे कचरा, प्रधान जी कीचड़ में फँस गई रे ।

 तुमको............।।


किसी के दुआरे पे सोलर लगा है 

किसी के दुआरे खडंजा गड़ा है 

हमरे दुआरे भरा गड्ढा, प्रधान जी सड़कें भी धँस गई रे । 

तुमको...........।।


अपना तुम रहो बाबू महला दुमहला 

हमरी झोपड़िया में पानी चुए ला 

भीग जाय मोरी चदरिया, मैं रात दिन पानी उलच रही रे ।

तुमको..........।।


तुम से कहा राशन कार्ड बनवा दो 

मनरेगा में काम दिला दो 

सास,ससुर दोनो बूढ़े, प्रधान जी पेंशन भी रुक गई रे  ।

तुमको............।।


पड़ा चुनाव तब तुमका मैं देखी 

नाहीं तो तुम हो जाओ विदेसी 

ढूँढ़न कहाँ तुम्हें जाऊँ, प्रधान जी मैं तो हूँ कम पढ़ी रे ।

तुमको............।।


अबकी बार हम उसको जितावें 

गांव की उन्नति जो कर के दिखावे

हर दम सुने मोरी बात, अभी तक धोखे में पड़ी रही रे ।

तुमको.............।।


गाँव का रूप बदलना होगा

स्वच्छ मोहल्ला करना होगा

तभी मिलेगा मेरा वोट,वरन मैं तो मैके को जाय रही रे

तुमको...…......।।


**जिज्ञासा सिंह**