जिज्ञासा के गीत
इस ब्लॉग में मैंने स्वरचित लोकगीतों को उद्घृत किया है ,जो उत्तर भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं -
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कतकी नहान (पूर्णमासी मेला)
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मेला लगा है बड़ी धूम, सुनो री सखी । इक्का न चलबै, तांगा न चलबै । पैदल चलबै झूम झूम, सुनो री सखी ॥ आगे न चलबै पीछे न चलबै । चलबै बनाई एक झुंड...
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देवी गीत..
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( १ ) चुपके चुपके आईं, भवानी मोरे अँगनवाँ भोर भये रवि आने से पहले , देख नहीं मैं पाई , भवानी मोरे अँगनवाँ...
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सोहर गीत..(हास्य व्यंग)
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(१) जच्चा हमारी कमाल.. लगें फुलगेंदवा। खाय मोटानी हैं चलि नहिं पावहि फूला है दूनो गाल.. लगें फुलगेंदवा। पांव है सिरकी पेट है गठर...
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बैरी बदरवा
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गोइंड़े ठाढ़े बदरऊ न बरसैं । हमरी अटरिया पे झाँकि दिखावें हमहीं बुनियाँ को तरसें ॥ गोइंड़े ठाढ़े बदरऊ न बरसैं ॥ जाय के खेतवा से ...
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मेरे नैनों में श्याम बस जाना 🌺
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मेरे नैनों में श्याम बस जाना, मैं दर्पण बहाने देखूँ ॥ कारी कारी अँखियों में प्रीति बसी है, अधरों पे मुस्कान ऐसी सजी है, जैसे कोयल है गाए तर...
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शिव जी का भजन🌺
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शिव आए मेरे द्वारे मस्तक पर गंगा धारें । मैं मृग छाला ले आई और प्रभु का आसन बिछाई ...
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चूड़ी है रंगबिरंगी
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अरे रामा चूड़ी है रंगबिरंगी चुनरिया धानी रे हारी । मेरे माथे सजी है बिंदिया , नथनिया न्यारी रे हारी ॥ मै...
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