जिज्ञासा के गीत
इस ब्लॉग में मैंने स्वरचित लोकगीतों को उद्घृत किया है ,जो उत्तर भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं -
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बैरी बदरवा..अवधी गीत
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बैरी बदरवा
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गोइंड़े ठाढ़े बदरऊ न बरसैं । हमरी अटरिया पे झाँकि दिखावें हमहीं बुनियाँ को तरसें ॥ गोइंड़े ठाढ़े बदरऊ न बरसैं ॥ जाय के खेतवा से ...
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