जिज्ञासा के गीत
इस ब्लॉग में मैंने स्वरचित लोकगीतों को उद्घृत किया है ,जो उत्तर भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं -
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मेला में पत्नी का बिछुड़ना..कतकी मेला ( कार्तिक मेला)
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मेला में पत्नी का बिछुड़ना (लोकगीत)
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मोरी धनियाँ मेला म हेराय गईं । अगवा से हम चलैं पीछे मोरी धनियाँ, न जाने कैसे डगरिया भुलाय गईं । पहली बार धना घर से हैं निकरी, भी...
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