जिज्ञासा के गीत
इस ब्लॉग में मैंने स्वरचित लोकगीतों को उद्घृत किया है ,जो उत्तर भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं -
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चैती लोकगीत
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(१) सइयाँ खिसियाने.. भितर डेवढ़िया सासू सोइ गईं रामा, सइयाँ खिसियाने॥ खन खन बोले मोरे हाथे के कंगनवाँ, पाँव सजी बोले पैजनियाँ हो रामा, सइयाँ...
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