जिज्ञासा के गीत
इस ब्लॉग में मैंने स्वरचित लोकगीतों को उद्घृत किया है ,जो उत्तर भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं -
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पिचकारी और सारी
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भर भर मारी पिचकारी सजन मोरी भीज गई सारी द्वारे से आए ससुर मुस्काएं सासू हंसे दै दै तारी, सजन मोरी..... ई सारी मोरे मैके से आई अ...
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रंगरंगीला होली गीत
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होली रंगन का त्योहार बलम जी खेलन जइबे आज । सात मेर के रंग मंगइबे, बीच आँगन मा कुंड खोदैबे रंग देब घुलवाय, बलम जी खेलन जइबे आज होली रंगन .....
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फगुनिया ओढ़नी
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देखो सखी ओढ़नी मंगाई फागुन में धानी रंग ओढ़नी बसंती रंग ओढ़नी लाल रंग ओढ़नी मंगाई फागुन में फूल छाप ओढ़नी चिरैया छाप ओढ़नी हिरनी छाप ओढ़नी...
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गौरैया ( गौरैया दिवस-लोकगीत )
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मेरे घर आना, तू प्यारी गौरैया । शोर मचाना, तू प्यारी गौरैया ।। तोता को लाना, मैना को लाना बुलबुल को लाना, तू प्यारी गौरैया ।। म...
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भजन (शिवरात्रि)
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मोहे भोले की चढ़ गई भाँग, गौरा पूजन गई आँखों में चढ़ गई, माथे पे चढ़ गई वो तो चढ़ गई मोरे कपाल, गौरा पूजन गई । अंदर से झूमीं, मैं बाह...
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एक गृहणी की प्रतिज्ञा (महिला दिवस )
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घर की मैं महारानी सुनो री सखी अपने मन की रानी सुनो री सखी पौधे लगाऊंगी फूल खिलाऊँगी सब्जी उगाऊँगी फल भी उगाऊँगी गमले में करूं बा...
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माँ सरस्वती की अराधना
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सरस्वती ! तुम बुद्धि की रानी मेरी शक्ति मेरी भक्ति तुम ही मेरी कहानी सरस्वती तुम....... तुम को जब से है अपनाया जग की जानी कह...
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